Monday, August 14, 2017

25 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने डाक विभाग की राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता 'ढाई आखर' में की भागीदारी

डाक विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित 'ढाई आखर' पत्र लेखन प्रतियोगिता में जोधपुर रीजन के स्कूली बच्चे बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं। डाक विभाग ने  बच्चों और युवाओं को पत्र लेखन के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु इस प्रतियोगिता का राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन किया है। राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं  श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  जोधपुर रीजन में अब तक 237 स्कूलों के 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने इस प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भागीदारी की है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में युवा पीढ़ी को अंतर्देशीय पत्र, पोस्टकार्ड, लिफाफों और डाक टिकटों के बारे में विशेष जानकारी नहीं है, ऐसे में सिर्फ डाक विभाग के स्तर पर ही नहीं बल्कि साहित्य में भी एक विधा के रूप में पत्र लेखन के विलुप्त होने का ख़तरा बढ़ रहा है। ऐसे में  डाक विभाग पत्र लिखकर लोगों को प्रेरित करने के लिए तथा लुप्त हो गई अंतर्देशीय पत्र से परिचित कराने के लिए अखिल भारतीय पत्र लेखन प्रतियोगिता ‘ढाई आखर’ का आयोजन करा रहा है। इसमें सभी वर्गों के लोग भाग ले सकते हैं। 
 डाक निदेशक  श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  'ढाई आखर' प्रतियोगिता में में "प्रिय बापू, आपने मुझे प्रेरित किया"  विषय पर 15 अगस्त, 2017 तक पत्र लिखना होगा।  पत्र  डाक विभाग द्वारा जारी अंतर्देशीय पत्र अथवा लिफाफे में ही स्वीकार्य होगा,  जिसमें क्रमशः 500 और 1,000 शब्दों में अंग्रेजी, हिन्दी अथवा स्थानीय भाषा में पत्र लिखा जा सकता है। इस  पत्र लेखन प्रतियोगिता में किसी भी उम्र के लोग भाग ले  सकते हैं। पहला वर्ग 18 वर्ष तक तथा दूसरा 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग का होगा। शहरों में  पत्र को प्रधान डाकघर या अन्य वितरण डाकघरों में इसके लिए निर्दिष्ट लेटर बॉक्स में ही  डालना होगा, जबकि गाँवों में लोग इसे अपने शाखा डाकपाल के माध्यम से भेज  सकते हैं।  पत्र में अपना पूरा नाम, पता व जन्मतिथि के प्रमाण-पत्र  सहित चीफ पोस्टमास्टर जनरल, राजस्थान परिमंडल, जयपुर-302007  के पते पर 15 अगस्त, 2017 तक निर्धारित लेटर बॉक्स में  डाल दें। 





प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए भारत सरकार द्वारा आकर्षक पुरस्कार की व्यवस्था भी की गई है।  डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि  प्रतियोगिता के विजेताओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर तीन-तीन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इनमें परिमंडलीय (राज्य) स्तर पर चयनित श्रेष्ठ पत्रों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी में क्रमश: पचीस हजार, दस हजार व  पांच हजार रूपए का पुरस्कार दिया जायेगा। अखिल भारतीय स्तर पर चयनित श्रेष्ठ पत्रों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी में क्रमश: पचास हजार, पचीस हजार व दस हजार रूपए का पुरस्कार दिया जायेगा। चयनित पत्रों  के लेखकों को पुरस्कार के साथ टाइटल से भी सम्मानित किया जाएगा। चयनित पत्रों  को 2 अक्टूबर, 2017 को साबरमती आश्रम, गुजरात  में  आयोजित समारोह में  पुरस्कृत किया जाएगा  और एक विशेष  प्रदर्शनी में प्रदर्शित भी किया जायेगा।



जोधपुर मंडल के प्रवर डाक अधीक्षक श्री बीआर सुथार ने बताया कि जोधपुर जनपद से सोहनलाल मनिहार उच्च माध्यमिक विद्यालय, सेंट्रल अकादमी स्कूल, राजकीय सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, सिवांचीगेट, वरूण पब्लिक स्कूल, सिवांचीगेट, जवाहर नवोदय विद्यालय सिलवासिनी, लक्की बाल निकेतन, उम्मेद कन्या सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, अपेक्स सैकेण्डरी स्कूल, महावीर पब्लिक स्कूल, राजकीय सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, शेरगढ, राजकीय विद्यालय पुलिस लाइन, राजस्थान सीनियर सैकेण्डरी स्कूल देचू सहित तमाम स्कूलों की भागीदारी उत्साहजनक रही।

















Dhai Akhar, All India letter writing competition by India Post  on subject Dear Bapu (Mahatma Gandhi) you inspire me. Many Schools of Rajasthan Western Region, Jodhpur participated actively in this competition and children/ Youth learn about letter writing and dropping letters in red letter boxes in era of e-mail, Social media and watsapp. 

Monday, August 7, 2017

राखी के धागों की अहमियत अभी भी बरकरार, विदेशों में भी राखी का क्रेज : डाकघरों द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन सहित तमाम देशों में भेजी गई राखियाँ

रेशम के धागों ने सोशल मीडिया पर चल रही वर्चुअल रखियों को बौना साबित कर दिया है। वाट्सएप, फेसबुक, स्काइपी, टेलीग्राम जैसे बड़े सोशल प्लेटफॉर्म को छोडकर बहनें, भाईयों की कलाइयाँ सजाने के लिए डाक से रंग-बिरंगी राखियाँ भेजना पसंद कर रही हैं । डाक विभाग भी इसके लिए मुस्तैद है और तमाम तैयारियाँ किए हुये है । राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वर्चुअल होते रिश्तों के बीच राखी के धागों की अहमियत अभी भी बरकरार है। तभी तो आज भी बहनें देश के साथ-साथ विदेशों में रह रहे अपने भाईयों को  डाक से राखी भेजना नहीं भूलती हैं और भाई भी इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि जोधपुर में इस दौरान एक लाख से ज्यादा राखियाँ पोस्टमैनों द्वारा वितरित की गईं और 85  हजार से ज्यादा राखियॉं जोधपुर के डाकघरों से बुक होकर देश-विदेश भेजी गईं। राखियों के त्वरित निस्तारण हेतु डाक विभाग द्वारा डाकघरों से लेकर रेलवे मेल सर्विस और सॉर्टिंग हब तक में अतिरिक्त स्टाफ लगाकर विशेष प्रबंध किये गए। 


राखी का क्रेज देश से बाहर विदेशों में भी खूब है। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि जोधपुर से विदेशों के लिए भी स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड डाक द्वारा खूब राखियाँ भेजी गईं। इनमें ज्यादातर राखियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब  और  कनाडा भेजी गई हैं। खाड़ी देशों  मे डाक भेजने वाले अधिकतर लोग मध्यम वर्ग के हैं। 

विदेशों में राखियाँ भेजने के लिए बहनें पहले से ही तैयारी करने लगती हैं, ताकि सही समय पर भाईयों को राखी पहुँच जाये और उनकी कलाई सूनी न रहे। श्री यादव ने बताया कि पिछले एक माह में 650 से अधिक राखियाँ जोधपुर के डाकघरों द्वारा विदेशों के लिए बुक की गईं। 

सावन के महीने में राखी सुरक्षित पहुंचे, इसके लिए भी डाक विभाग ने विशेष प्रबंध किये । रक्षाबंधन भेजने हेतु  वाटरप्रूफ डिजायनर लिफाफों का प्रबंध किया गया । प्रवर डाक अधीक्षक श्री बीआर सुथार ने बताया कि प्रधान डाकघर, जोधपुर द्वारा 5,342 लिफाफों की बिक्री की गई। 

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक है, पर अब इसका दायरा भाई-बहन तक ही सीमित नहीं रहा। चर्चित ब्लॉगर व्  लेखिका सुश्री आकांक्षा यादव कहती हैं कि हाईटेक होते समाज में भी रिश्तों का जुड़ाव ख़त्म नहीं होता, तभी तो राखी के धागों की आत्मीयता अभी भी बरकरार है।



राखी के धागों की अहमियत अभी भी बरकरार : जोधपुर में एक लाख से ज्यादा राखियाँ पोस्टमैनों द्वारा हुई वितरित
विदेशों में भी राखी का क्रेज : डाकघरों द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन सहित तमाम देशों में भेजी गई सैकड़ों राखियाँ



 देश में भाई-बहन के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने वाले रक्षाबंधन के त्यौहार पर देश-विदेशों में रह रहे भाइयों को भी बहनों ने डाक से हजारों राखियां भेजी है...

Thursday, August 3, 2017

डाकघरों द्वारा गंगाजल की बिक्री रही हिट, जोधपुर रीजन में 3,800 लीटर से ज्यादा गंगाजल की हुई बिक्री

डाकघरों द्वारा गंगाजल की बिक्री को लोगों ने हाथों-हाथ लिया है। यही कारण है कि इनकी डिमांड दिनों-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सावन के महीने में तो गंगाजल की बिक्री और भी बढ़ गई है। लोग अपने इलाके के डाकिये से गंगाजल की फरमाइश कर रहे हैं तो कई जगहों पर मंदिरों के सामने डाक विभाग ने विशेष स्टॉल भी लगाए हैं। राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि सिर्फ इस सावन के महीने में अब तक 1,000 लीटर से ज्यादा गंगाजल की बिक्री हो चुकी है। 
राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि जोधपुर रीजन में अब तक 3,800 लीटर से ज्यादा गंगाजल की बिक्री की जा चुकी है।  इसमें ऋषिकेश का  गंगाजल करीब 3,460 लीटर और गंगोत्री का 340 लीटर शामिल है। ऋषिकेश गंगाजल की 200 मिलीलीटर की 5,900 व 500 मिलीलीटर की 4,470 बोतलें, वहीँ गंगोत्री गंगाजल की 200 मिलीलीटर की 223  व 500 मिलीलीटर की 591 बोतलें बिक्री हो चुकी हैं। 
डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि गंगा जल का विशेष महत्व है और परिवारों में पूजा-पाठ, अन्य धार्मिक अनुष्ठान, शादी-ब्याह  और यहाँ  तक कि श्राद्ध के वक्त गंगाजल की जरूरत होती है। ऐसे में प्रधान डाकघरों के माध्यम से  200 और 500 मिलीलीटर में ऋषिकेश से संग्रहित गंगाजल क्रमशः 15 और 22 रूपये में एवं 200 और 500 मिलीलीटर में ही गंगोत्री से संग्रहित गंगाजल क्रमशः 25 और 35 रूपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
 श्री यादव ने कहा कि  गंगाजल बिक्री से लाभ कमाने का मकसद नहीं है, बल्कि डाक विभाग ने गंगाजल के प्रति लोगों की असीम आस्था एवं विश्वास की पवित्र भावना का सम्मान करते हुए गंगोत्री व ऋषिकेश से संग्रहित गंगाजल को उन तक पहुंचाने का प्रयास है, जिससे कि लोग लाभान्वित हो सकें। श्री यादव ने कहा कि यदि कोई अपने द्वार पर ही गंगाजल मंगाना चाहता है तो वह  गंगाजल के मूल्य, पैकेजिंग चार्ज और स्पीड पोस्ट दर का अग्रिम भुगतान कर मँगवा सकता है।  ऐसे ग्राहकों को स्पीड पोस्ट से गंगाजल भेज दिया जायेगा।


( सावन माह में शिव मंदिरों के समक्ष गंगाजल की बिक्री हेतु डाक विभाग द्वारा लगाए गए विशेष काउंटर)






Monday, July 31, 2017

डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने हिन्दी साहित्य में उपन्यास सम्राट के रूप में बनाई पहचान

प्रेमचंद के लगभग सभी पात्र कहानियों से निकल कर उपन्यासों से बाहर आकर एक अलग संसार रचते हैं और इन चरित्रों की छाप इतने गहरे उतरती है कि यह हमारे अवचेतन का हिस्सा हो जाते हैं। ‘पंच परमेश्वर’ के अलगू चैधरी और जुम्मन शेख न्याय की निष्पक्षता को एक रुहानी ऊँचाई देते हैं और हामिद के चिमटे में छिपी भावना पूरी ‘ईदगाह’ में बड़े मियाँ के सजदे में झुकने से भी बड़ी इबादत हो जाती है। उक्त उद्गार 31 जुलाई को प्रेमचंद की जयंती पर राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर  के निदेशक डाक सेवाएं और हिंदी साहित्यकार व् ब्लॉगर  कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये।
निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने हिन्दी साहित्य में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बनाकर साहित्य की नई इबारत लिखी। जब प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव गोरखपुर में डाकमुंशी के पद पर कार्य कर रहे थे उसी समय गोरखपुर में रहते हुए ही उन्होंने अपनी पहली रचना लिखी। श्री यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए हम  सब बड़े हो  गए। उनकी रचनाओं से बड़ी  आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे इन रचनाओं के  पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। 
 डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आज भूमंडलीकरण के दौर में भी प्रेमचन्द के साहित्यिक और सामाजिक विमर्श उतने ही प्रासंगिक हैं। राष्ट्र आज भी उन्हीं समस्याओं से जूझ रहा है जिन्हें प्रेमचन्द ने काफी पहले रेखांकित कर दिया था। चाहे वह जातिवाद या सांप्रदायिकता का जहर हो, चाहे कर्ज की गिरफ्त में आकर आत्महत्या करता किसान हो, चाहे नारी की पीड़ा हो, चाहे शोषण और समाजिक भेद-भाव हो।  उनका साहित्य शाश्वत है और उनकी रचनाएँ यथार्थ के करीब रहकर  समय से होड़ लेती नजर आती हैं।
(आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद के विमर्श : कृष्ण कुमार यादव)


 (साहित्य से इतर भी प्रासंगिक हैं मुंशी प्रेमचंद के विचार : कृष्ण कुमार यादव)
(प्रेमचंद के सामाजिक व साहित्यिक विमर्श : कृष्ण कुमार यादव)

मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं- डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 

मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य में उपन्यास सम्राट के रूप में जाने गए : कृष्ण कुमार यादव 



मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं  में आत्मीयता की झलक :  कृष्ण कुमार यादव 


       मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं- डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव