Sunday, July 31, 2016

मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं- कृष्ण कुमार यादव




मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए हम सब बड़े हो गए। उनकी रचनाओं से बड़ी आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे इन रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था।  उक्त उद्गार 31 जुलाई को प्रेमचंद की जयंती पर राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं और हिंदी साहित्यकार साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। 

        निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य राजा-रानी के किस्सों, रहस्य-रोमांच में उलझा हुआ था। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा। प्रेमचन्द के साहित्यिकऔर सामाजिक विमर्श आज भूमंडलीकरण के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उनकी रचनाओं के पात्र आज भी समाज में कहीं न कहीं जिन्दा हैं। ‘गोदान’ ने प्रेमचन्द को हिन्दी साहित्य में वही स्थान दिया जो रूसी साहित्य में ‘मदर’ लिखकर मैक्सिम गोर्की को मिला। प्रेमचन्द जब अपनी रचनाओं में समाज के उपेक्षित व शोषित वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हैं तो निश्चिततः इस माध्यम से वे एक युद्ध लड़ते हैं और गहरी नींद सोये इस वर्ग को जगाने का उपक्रम करते हैं। उनका साहित्य शाश्वत है और यथार्थ के करीब रहकर वह समय से होड़ लेती नजर आती हैं। 

श्री यादव ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने को किसी वाद से जोड़ने की बजाय तत्कालीन समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से जोड़ा। राष्ट्र आज भी उन्हीं समस्याओं से जूझ रहा है जिन्हें प्रेमचन्द ने काफी पहले रेखांकित कर दिया था, चाहे वह जातिवाद या साम्प्रदायिकता का जहर हो, चाहे कर्ज की गिरफ्त में आकर आत्महत्या करता किसान हो, चाहे नारी की पीड़ा हो, चाहे शोषण और समाजिक भेद-भाव हो। कृष्ण कुमार यादव ने जोर देकर कहा कि आज प्रेमचन्द की प्रासंगिकता इसलिये और भी बढ़ जाती है कि आधुनिक साहित्य के स्थापित नारी-विमर्श एवं दलित-विमर्श जैसे तकिया-कलामों के बाद भी अन्ततः लोग इनके सूत्र किसी न किसी रूप में प्रेमचन्द की रचनाओं में ढूंढते नजर आते हैं। 

श्री कृष्ण कुमार यादव यादव ने कहा कि एक लेखक से परे भी उनकी चिन्तायें थीं और उनकी रचनाओं में इसकी मुखर अभिव्यक्ति हुई है। उनकी कहानियों और उपन्यासों के पात्र सामाजिक व्यवस्थाओं से जूझते हैं और अपनी नियति के साथ-साथ भविष्य की इबारत भी गढ़ते हैं। नियति में उन्हें यातना, दरिद्रता व नाउम्मीदी भले ही मिलती हो पर अंतत: वे हार नहीं मानते हैं और संघर्षों की जिजीविषा के बीच भविष्य की नींव रखते हैं।



श्री यादव ने बताया  कि उन्हें पिछले दिनों मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही जाने का सु-अवसर प्राप्त हुआ और वहाँ जाकर  मुंशी प्रेमचंद स्मारक लमही, वाराणसी के पुस्तकालय हेतु अपनी पुस्तक '16 आने 16 लोग' भी भेंट की, जिसमें एक लेख प्रेमचंद के कृतित्व पर भी शामिल है।




 (प्रेमचंद जयंती - क्या हुआ मुंशी प्रेमचंद के सपनों का -कृष्ण कुमार यादव)

Saturday, July 30, 2016

'अटल पेंशन योजना' सद्भाव सप्ताह में जोधपुर रीजन अव्वल

भारत सरकार द्वारा अटल पेंशन योजना से अधिकाधिक लोगों को जोड़ने हेतु 25 से 29 जुलाई, 2016  तक अटल पेंशन योजना सद्भाव  सप्ताह का आयोजन किया गया।  डाक विभाग ने इसके तहत तमाम कार्यक्रम किये और अधिकाधिक लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया। पूरे भारत में राजस्थान डाक परिमंडल ने इस दौरान डाकघरों में सर्वाधिक 1019 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़ा, जिसमें अकेले जोधपुर रीजन का योगदान 711 है। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि जोधपुर रीजन में इस दौरान 711 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़ा गया, जो कि राजस्थान में सर्वाधिक है। इसमें राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर  के बीकानेर (287), पाली (133) और सिरोही (85) मंडल सर्वोच्च तीन योगदानकर्ताओं में रहे, वहीं जोधपुर मंडल ने 52 लोगों को जोड़कर छठा स्थान प्राप्त किया। 

निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि अटल पेंशन योजना भारत सरकार द्वारा समर्थित पेंशन योजना है, जिसका लक्ष्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को पेंशन की सुविधा प्रदान करना है।  इससे जुड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल तथा अधिकतम उम्र 40 साल है। इसके तहत अंशधारकों को 60 साल पूरा होने पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक पेंशन मिलेगी जो उनके योगदान पर निर्भर करेगा।

गौरतलब है कि पूरे भारत में राजस्थान डाक परिमंडल ने अटल पेंशन योजना सद्भाव सप्ताह के  दौरान सर्वाधिक 1019 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़ा, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे तमिलनाडु और महाराष्ट्र परिमण्डल ने क्रमशः 722 और 699 लोगों को जोड़ा। राजस्थान में अकेले पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर रीजन का योगदान  711 है, जबकि जयपुर और अजमेर ने इस दौरान क्रमशः 215 और 93 लोगों को इस योजना से जोड़ा।





Friday, July 29, 2016

डाक-तार विभाग में भी काम किया था मशहूर लेखिका महाश्‍वेता देवी ने

मशहूर लेखिका और समाजसेविका महाश्‍वेता देवी नहीं रहीं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि जीवन के अपने आरंभिक दिनों में कोलकाता में उन्होंने डाक और तार विभाग में भी कार्य किया था। साहित्‍य अकादमी, ज्ञानपीठ अवार्ड, रेमन मैग्‍सेसे और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित महाश्‍वेता देवी को आदिवासी लोगों के लिए काम करने के लिए भी जाना जाता है। महाश्वेता देवी का खुद का जीवन भी झंझावतों और संघर्षों से भरा रहा। 1949 में महाश्वेता देवी को केंद्र सरकार के डिप्टी अकाउंटेंट जनरल, पोस्ट एंड टेलिग्राफ ऑफिस में अपर डिवीजन क्लर्क की नौकरी मिली, लेकिन पति मशहूर रंगकर्मी विजन भट्टाचार्य कम्युनिस्ट थे, इसलिए उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद महाश्वेता देवी ने साबुन बेचकर और ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्च चलाया। बाद में 1957 में स्कूल में टीचर की नौकरी लगी। बाद में वे कोलकाता यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की लेक्चरर रहीं। 1984 में उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया और लेखन में सक्रिय हो गईं।

Tuesday, July 26, 2016

सावन में घर बैठे स्पीड पोस्ट से पाएँ काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर का प्रसाद

सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा और उनके प्रसाद की बड़ी महिमा है। अक्सर लोगों की इच्छा होती है कि काश घर बैठे ही उन्हें बाबा भोलेनाथ का प्रसाद मिल सके। ऐसे में डाक विभाग ने इस बात के प्रबन्ध किये हैं कि देश के किसी भी कोने में बैठे शिवभक्त दो प्रमुख ज्योतिर्लिंगों - काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस और महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का प्रसाद घर बैठे स्पीड पोस्ट द्वारा ग्रहण कर सकें। गौरतलब है कि हाल ही में डाक विभाग ने प्रधान डाकघरों के माध्यम से गंगोत्री और ऋषिकेश से संग्रहित पवित्र गंगा जल की बिक्री भी आरंभ की है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच चल रहे एक एग्रीमेण्ट के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद स्पीड पोस्ट द्वारा लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत 61 रूपये का मनीआर्डर प्रवर डाक अधीक्षक, वाराणसी (पूर्वी), उत्तर प्रदेश के नाम भेजना होता है और बदले में वहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से मंदिर की भभूति, रूद्राक्ष, भगवान शिव की लेमिनेटेड फोटो और शिव चालीसा प्रेषक के पास प्रसाद रूप में भेज दिया जाता है। 

निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद भी डाक द्वारा मंगाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्धन कमेटी, उज्जैन को 251 रूपये का मनीआर्डर करना पड़ेगा और इसके बदले में वहाँ से स्पीड पोस्ट द्वारा प्रसाद भेज दिया जाता है। इस प्रसाद में 200 ग्राम ड्राई फ्रूट, 200 ग्राम लड्डू, भभूति और भगवान श्री महाकालेश्वर जी का चित्र शामिल है। 

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि इस प्रसाद को प्रेषक के पास एक वाटर प्रूफ लिफाफे में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाता है, ताकि पारगमन में यह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के इन  सर्वप्रमुख ज्योतिर्लिंग के दर्शन की कामना समस्त विश्व में भक्तों की होती है, लेकिन सभी के लिए यहाँ पहुँचकर भगवत आराधना करना संभव नहीं हो पाता और इसी बात को ध्यान में रखते हुए डाक विभाग के माध्यम से भक्तों को शिव का सान्निध्य प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।  




Monday, July 25, 2016

अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क, इलाहाबाद पर विशेष आवरण


इलाहाबाद स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क पर उत्तर प्रदेश डाक परिमण्डल द्वारा चंद्रशेखर आजाद की 110वीं जयंती पर 23 जुलाई, 2016 को जारी विशेष आवरण और विरूपण !!
(Special Cover and cancellation released on Amar Shaheed Chandrashekhar Azad Park, Allahabad)

Friday, July 22, 2016

चिट्ठी और मोबाइल

उसने चिट्ठी लिखी, लिफाफे में भरी और टेबुल पर रखकर पोस्ट ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा। चिट्ठी के बगल में ही मोबाइल आराम फरमा रहा था। उसे देखते ही उसके होठों पर एक कुटिल मुस्कान तैर गई – “हेलो, अभी तक जिंदा हो?” उसने तंज़ कसा। 

कयामत तक जिंदा रहूँगी ! 

यह भी कोई जीना ! कछुए की तरह !

आखिर में कछुए की ही जीत हुई थी !

हाऊ बोरिंग स्टोरी ! आउट डेटेड ! मुझे देखो, फोरजी स्पीड ! ग्लोरियस लाइफ ! 

दूसरे के दम पर !

सो व्हाट? इसी दम पर तुम्हारे साथियों को कब्रिस्तान पहुँचा चुका हूँ। अब तेरी बारी है। 

मुझे नेस्तनाबूत करने का ख्वाब मत देखो। जब तक तुम में ऊर्जा है, खूब बोलियाँ निकलेंगी। दुनिया तेरी मुट्ठियों में रहेगी, उसके बाद टांय-टांय फिस्स ! 

फास्ट कम्युनिकेशन के जमाने में जो प्रोग्रेस चाहता है वह ऊर्जा से प्यार करता है। तरक्की और ऊर्जा में गहरा रिश्ता है। 

कोई भी रिश्ता दिल के रिश्ते से बड़ा नहीं होता। 

व्हाट दिल विल ? जेट युग में इसे कौन पूछता है।

तुम क्या जानो दिल की अहमियत! दिल की बदौलत दुनिया बदसूरत होने से बची हुई है। तुम तो बगैर रूह वाला जिस्म हो। फिर भी जमाना इस जिस्म का दीवाना है। 

इस दीवानगी में जज़्बात की कोई जगह नहीं। संवेदना का कोई मोल नहीं। टोटली-मेकानायिज्ड रीलेशन !

और तुम्हारा रिलेशन?

मुझे नाज है सदियों पुराने रिश्ते पर। मेरे हर हर्फ में रूह बसती है। हर लफ्ज मे संजींदगी। पूरे वजूद में अपनेपन के एहसास की खुशबू। दिल की गहराई तक उतरने वाला अल्फ़ाज ! 

..... इसी बीच मोबाइल के जिस्म से अजीब तरह की टुई-टुई आवाज आने लगी। इससे बेखबर चिट्ठी अपने प्रवाह में बहती रही। मेरे स्पर्श से ही जिस्म के रेशे-रेशे में जल-तरंग बजने लगता है। जिसकी स्वर-लहरियाँ घर-आँगन को मौसिकी से भर देती हैं। चिट्ठी लिखने वाला और पढ़ने वाला पूरी शिद्दत से गुफ्तगू करने लगते हैं। दोनों आंतरिकता की महक से सराबोर हो जाते हैं। दूरियाँ आँसू बहाने लगती हैं। नजदीकियाँ मुस्कराने लगती हैं। 

पुनः मोबाइल के जिस्म से पहली वाली आवाज आने लगी? क्यों भाई, तुम्हारी जुबान को क्या हो गया? लगता है कि जवाब देते नहीं बन पा रहा है, इसलिए तुम्हारी जुबान लड़खड़ा रही है। मुझे मालूम है, सच्चाई का सामना करने की कूबत  तुझमें नहीं हैं। 

मोबाइल लाजवाब हो गया। 

उसकी खामोशी चिट्ठी को अखरने लगी। प्रत्युत्तर न पाकर उसने थोड़ा उचक कर झाँका, अरे यह तो बेजान हो गया! 

-मार्टिन जॉन, अपर बेनियासोल, पो. आद्रा, जिला-पुरुलिया, पश्चिम बंगाल-723121 
                                       (साभार: अक्षर पर्व, जुलाई-2016)

Monday, July 11, 2016

भारतीय डाक की अनूठी पहल- गंगाजल आपके घर : गंगाजल की बिक्री प्रधान डाकघरों से आरंभ

गंगा जल लाने के लिए अब गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार  या इलाहाबाद और बनारस के गंगा तट जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी, बल्कि अब गंगा जल डाकघरों के माध्यम से आपके घर पर उपलब्ध होगा। अगर आपको गंगा जल की जरूरत है तो प्रधान डाकघर के काउंटर पर जाइए, निर्धारित कीमत अदा कीजिए और गंगाजल घर ले जाइए। डाक विभाग द्वारा आरम्भ की गई इस अभिनव योजना के तहत  11 जुलाई को जोधपुर प्रधान डाकघर में गंगाजल बिक्री का शुभारम्भ करते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इस योजना से डाक विभाग लोगों से  भावनात्मक स्तर पर भी जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि गंगाजल वितरण से लाभ कमाने का मकसद नहीं है, बल्कि डाक विभाग ने गंगाजल के प्रति लोगों की असीम आस्था एवं विश्वास की पवित्र भावना का सम्मान करते हुए गंगोत्री व ऋषिकेश से संग्रहित गंगाजल को उन तक पहुंचाने का प्रयास है, जिससे कि लोग लाभान्वित हो सकें। 
डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि गंगा जल का विशेष महत्व है और परिवारों में पूजा-पाठ, अन्य धार्मिक अनुष्ठान, शादी-ब्याह  और यहाँ  तक कि श्राद्ध के वक्त गंगाजल की जरूरत होती है। ऐसे में प्रधान डाकघरों के माध्यम से  200 और 500 मिलीलीटर में ऋषिकेश से संग्रहित गंगाजल क्रमशः 15 और 22 रूपये में एवं 200 और 500 मिलीलीटर में ही गंगोत्री से संग्रहित गंगाजल क्रमशः 25 और 35 रूपये में उपलब्ध होगा। 

 श्री यादव ने कहा कि चूँकि गंगा जल की बिक्री अभी प्रधान डाकघरों के माध्यम से ही होगी, ऐसे में यदि कोई अपने द्वार पर ही गंगाजल मंगाना चाहता है तो वह  डाकघर में गंगाजल के मूल्य, पैकेजिंग चार्ज और स्पीड पोस्ट दर का अग्रिम भुगतान कर मँगवा सकता है।  ऐसे ग्राहकों को स्पीड पोस्ट से गंगाजल भेज दिया जायेगा।

इस अवसर पर डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने चौपासनी रोड, जोधपुर निवासी श्रीमती पूजा को प्रथम ग्राहक के रूप में गंगाजल सौंपा। इस अवसर पर जोधपुर मण्डल के प्रवर डाक अधीक्षक  पी॰आर॰ कडेला, सीनियर पोस्टमास्टर एल॰एस॰ पटेल, सहायक निदेशक  इशरा राम, कान सिंह राजपुरोहित , सहायक अधीक्षक  विनय खत्री, तरुण शर्मा, राजेंद्र सिंह भाटी  सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।








Tuesday, July 5, 2016

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के पोस्टल मार्केटिंग एक्जिक्युटिवज की जोधपुर में हुई एक दिवसीय कार्यशाला

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के सभी 10 डाक मंडलों के मार्केटिंग एक्जिक्युटिवज को डाक विभाग में नित हो रहे परिवर्तनों से रूबरू कराने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 5 जुलाई, 2016  को पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय स्थित कांफ्रेंस हॉल में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने किया।  इस अवसर पर विभिन्न प्रीमियम सेवाओं के बारे में पावर प्वाइंट द्वारा प्रस्तुति देकर मार्केटिंग एक्जिक्युटिवज को अद्यतन व प्रोत्साहित किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए निदेशक डाक सेवायें श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि व्यवसायिकता के इस दौर में बिना स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा के कोई भी संगठन उन्नति नहीं कर सकता और इस क्रम में डाक सेवा को मूल्यवर्धित सेवाओं से जोड़ते हुए विभाग ने लोगों की वर्तमान एवं भावी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये प्रौद्योगिकी आधारित तमाम नये उत्पाद एवं सेवायें भी आरम्भ की हैं। स्पीड पोस्ट आज एक विश्वनीय ब्रांड बन चुका है तो  बिजनेस पोस्ट के अंतर्गत सारी प्रीमेलिंग गतिविधियों को आसान तारीके से निपटाया जाता है। श्री यादव ने कहा कि ई-कामर्स के इस दौर में कैश अन डिलिवरी से जोड़ते हुए एक्सप्रेस पार्सल और बिजनेस पार्सल सेवा अारंभ की गई है, जिसका उद्देश्य दूरदराज व ग्रामीण इलाकों तक भी कम लागत में शीघ्र वितरण सेवा देकर ई-कामर्स बाजार को बढ़ावा देना है। 


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने सेवाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि व्यक्ति से लेकर व्यवसाय के हर सेक्टर की जरूरतों के मुताबिक डाक-सेवाओं का वर्गीकरण कर उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा  है। मीडिया पोस्ट के अंतर्गत डाक स्टेशनरी, लेटर बाक्स, मेल गाड़ी व डाकघरों में विज्ञापन लगाने की सुविधा प्राप्त है तो  रिटेल पोस्ट की मार्फत डाकघर अपने काउन्टरों पर फार्म बेचने और बिल जमा करने की सुविधा प्रदान करते हैं।  बिल मेल सेवा हर तिमाही न्यूनतम 5000 प्रपत्र व बिल एक ही जिले में प्रेषित करने वालों हेतु सामान्य दरों से कम मात्र 3 रुपये में डाक भेजने की सुविधा उपलब्ध कराता है,  वहीं डायरेक्ट पोस्ट के तहत बिना पता लिखी डाक के लक्षित जनता के दरवाजे पर डाकियों द्वारा वितरण सुनिश्चित किया जाता है। शहर और गाँवों के बीच डिजिटल डिवाइड के अंतराल को कम करने के लिए ई-पोस्ट सेवा है, जिसमें ई-मेल द्वारा भेजे गए पत्र की हार्ड कॉपी निकालकर डाकिया द्वारा वितरित किया जाता है।  श्री  यादव ने कहा कि  आन-लाइन ट्रैकिंग, बुक नाउ-पे लेटर, बल्क मेल पर छूट, फ्री पिकअप,  कैश आन डिलेवरी जैसी स्कीमों के तहत डाक सेवाओं को और आकर्षक बनाया गया है। इसके अलावा  ई-पेमेण्ट, लाजिस्टिक पोस्ट, फिलेटली, माई स्टैंप इत्यादि के संबंध में भी उन्होंने जानकरी दी ।

निदेशक डाक सेवायें श्री कृष्ण कुमार यादव ने  विपणन अधिकारियों  से रूबरू होते हुए कहा कि  वर्तमान परिवेश में मजबूती से खड़े रहने के लिए हमें बाजार की आवश्यकताओं, संभावनाओं एवं जोखिम के प्रति अत्यन्त संवदेनशील रहने की जरूरत है। यह युग तकनीकी का युग है। तकनीक के प्रति पल-प्रतिक्षण अपडेट रहने की आवश्यकता है। श्री यादव ने जोर देकर कहा कि प्रतियोगिता के इस दौर में ग्राहक को अपने साथ जोड़े रखना सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए पारदर्शी, संवेदनशील एवं सम्मानजनक ग्राहक सेवा के साथ जरूरी है कि हम अपने ग्राहकों के सहयोगी एवं मार्गदर्शक बने।

इस अवसर पर सहायक निदेशक इशरा राम, वरिष्ठ लेखा अधिकारी बी. पी. टाक, सहायक डाक अधीक्षक  तरुण शर्मा, डाक निरीक्षक  सुदर्शन सामरिया इत्यादि ने  विभिन्न सेवाओं और उनके विभिन्न पहलुओं  के संबंध में लोगों को जानकारी दी।