Friday, July 31, 2015

डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने लिखी साहित्य की नई इबारत - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव


हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था।  उक्त उद्गार प्रेमचंद की जयंती पर राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं और हिंदी साहित्यकार साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य की नई इबारत  लिखी। जब प्रेमचंद के पिता गोरखपुर में डाकमुंशी के पद पर कार्य कर रहे थे उसी समय गोरखपुर में रहते हुए ही उन्होंने अपनी पहली रचना लिखी। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए हम  सब बड़े हो  गए। उनकी रचनाओं से बड़ी  आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे इन रचनाओं के  पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं।   

  निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य राजा-रानी के किस्सों, रहस्य-रोमांच में उलझा हुआ था। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा। प्रेमचन्द के साहित्यिकऔर सामाजिक विमर्श आज भूमंडलीकरण के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उनकी रचनाओं के पात्र आज भी समाज में कहीं न कहीं जिन्दा हैं। प्रेमचन्द जब अपनी रचनाओं में समाज के उपेक्षित व शोषित वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हैं तो निश्चिततः इस माध्यम से वे एक युद्ध लड़ते हैं और गहरी नींद सोये इस वर्ग को जगाने का उपक्रम करते हैं। उनका साहित्य शाश्वत है और यथार्थ के करीब रहकर वह समय से होड़ लेती नजर आती हैं। 

श्री यादव ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने को किसी वाद से जोड़ने की बजाय तत्कालीन समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से जोड़ा। राष्ट्र आज भी उन्हीं समस्याओं से जूझ रहा है जिन्हें प्रेमचन्द ने काफी पहले रेखांकित कर दिया था, चाहे वह जातिवाद या साम्प्रदायिकता का जहर हो, चाहे कर्ज की गिरफ्त में आकर आत्महत्या करता किसान हो, चाहे नारी की पीड़ा हो, चाहे शोषण और समाजिक भेद-भाव हो। कृष्ण कुमार यादव ने जोर देकर कहा कि आज प्रेमचन्द की प्रासंगिकता इसलिये और भी बढ़ जाती है कि आधुनिक साहित्य के स्थापित नारी-विमर्श एवं दलित-विमर्श जैसे तकिया-कलामों के बाद भी अन्ततः लोग इनके सूत्र किसी न किसी रूप में प्रेमचन्द की रचनाओं में ढूंढते नजर आते हैं। 

Thursday, July 23, 2015

ग्रामीण डाक जीवन बीमा में बीमित सीमा 5 लाख से बढ़कर हुई 10 लाख रूपये

डाक विभाग को लोग सामान्यतया चिट्ठी-पत्री के लिए ही जानते हैं, पर डाक विभाग एक लम्बे समय से जीवन बीमा के क्षेत्र में भी है। बीमा के क्षेत्र में डाक विभाग नित नये आयाम भी स्थापित कर रहा है। अब  ग्रामीण डाक जीवन बीमा की अधिकतम बीमित सीमा 5 लाख से बढ़ाकर अब 10 लाख रूपये कर दी गयी है। इससे पूर्व इस साल के आरम्भ में डाक जीवन बीमा में बीमित राशि को बढा कर 20 से 50 लाख रूपये कर दिया गया था।

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 की प्रथम तिमाही में जोधपुर क्षेत्र में डाक विभाग ने लोगों का 45 करोड़ रूपये का जीवन बीमा किया है। इसमें डाक जीवन बीमा के तहत 35 करोड़ एवं ग्रामीण डाक जीवन बीमा के तहत 10 करोड़ रूपये का जीवन बीमा किया गया। इसके अलावा इसके तहत डाक जीवन बीमा में कुल 23 करोड़ एवं ग्रामीण डाक जीवन बीमा में साढे आठ करोड़ रूपये की प्रीमियम राशि जमा हुई है। 

निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन बीमा के लिए भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस योजना से ग्रामीणों को अधिकाधिक जोड़ने के लिये विभागीय अधिकारी व कर्मचारी विभिन्न स्तरों पर मेले लगा रहे हैं और ग्राम सरपंचों, स्कूली अध्यापकों व जनप्रतिनिधियों के जरिये लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण लोगों हेतु डाक विभाग ने सर्वप्रथम 1995 में ग्रामीण डाक जीवन बीमा आरंभ किया। अधिकाधिक लोगों  को बीमित करने हेतु हर डाक मण्डल में गाॅंवों को चिन्हित करके उन्हें ग्रामीण डाक जीवन बीमा ग्राम के रूप में कवर किया जा रहा है ।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि ”ग्रामीण डाक जीवन बीमा” में वर्तमान में 5 योजनायें-सुरक्षा, संतोष, ग्राम सुविधा, ग्राम सुमंगल व ग्राम प्रिया हैं। इसके तहत वर्तमान में सभी ग्रामीण व्यक्ति बीमा के पात्र हैं। इसमें न्यूनतम 19 व अधिकतम 55 वर्ष की सीमा रेखा रखी गई है। इसमें निवेश की सुरक्षा पर सरकार की गांरटी, धारा 88 के तहत आयकर में छूट, कम प्रीमियम और अधिक बोनस, पाॅलिसी पर लोन की सुविधा, देश के किसी भी डाकघर में प्रीमियम जमा करने की सुविधा और 6 महीने के अग्रिम प्रीमियम पर 1 फीसदी की छूट, 12 माह अग्रिम जमा पर 2 फीसदी की छूट दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि जमा प्रीमियम पर किसी तरह का किसी प्रकार के एजेन्ट कमीशन का भार प्रस्तावक पर नहीं पड़ता है। 

Wednesday, July 22, 2015

Postinfo brings Post Offices to mobile

Now, one will not have to visit a post office to enquire about the status of their postal dispatches or interest accrued on investments in financial schemes. For the benefit of customers, the postal department has launched mobile app 'Postinfo' that would provide all information available on mobile screen. The android based app is available free of cost. 

The app also allows a customer to save information for future reference and share it with others through bluetooth, messaging apps, WhatsApp and facebook. 


The tracking facility would help people trace the location of insured letter, value payable letter, registered packets, periodicals, insured parcel and electronic money order (e-MO) among others. 

The users can view the status of their articles by entering the article number and pressing the track button. It will instantly display details of their article on real time basis. 

Through the app, people would also be able to avail the facility of calculating interest accrued and total amount on their savings accounts. It would also provide information on various financial schemes launched by the department. 

"The app can also help customers calculate postage price to be paid for all types of articles based on the weight entered by the user through a 'postage calculator' feature of the app. The unique feature of the app is that in a single query it shows chargeable tariff for all postal items," 

Similarly premium calculator is another feature. The Postal department is offering various types of life insurance policies. The users can check the premium payable for all eligible types of postal or rural postal life insurance policies on the basis of the input entered. Similarly, interest can be calculated on all small saving schemes, including Central government's ambitious scheme, 'Sukanya Samriddhi yojana', recurring deposits, time deposit, monthly income scheme, senior citizen savings scheme, national savings certificate and kisan vikas patra among a number of others."

Saturday, July 4, 2015

अब डाक टिकटों पर भी झलकेगी बारिश में बच्चों की मस्ती

डाक टिकटों का संचय करने वाले और कला में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है,कि भारतीय डाक विभाग बाल दिवस-2015 पर जारी होने वाले डाक टिकट के लिए डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता का आगाज करने जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि आगामी बाल दिवस -2015 के लिए डाक विभाग ने ’बारिश में एक दिन’ थीम पर डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता की घोषणा की है, जिसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक इस विषय पर डाक टिकट व अन्य फिलेटेलिक सामग्री हेतु अपना मौलिक डिजाइन भेज सकता है। डाक टिकट डिजाइन हेतु राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः 10,000, 6000 व 4000 रूपये का प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार भी दिया जायेगा। 

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि यह डिजाइन इंक, वाटर व आयल कलर इत्यादि में हो सकती है, पर कम्प्यूटर प्रिन्टेंड/प्रिंट आउट की अनुमति नहीं होगी। डिजाइन के पीछे प्रतिभागी का नाम, उम्र, राष्ट्रीयता, पिन कोड के साथ आवासीय पता, फोन/मोबाइल नं0 व ई-मेल लिखा होना चाहिए। इसके साथ ही मौलिकता का एक घोषणपत्र भी संलग्न करना होगा। संबंधित प्रतिभागी स्पीड पोस्ट के माध्यम से 31 अगस्त, 2015  तक अपनी प्रविष्टियाँ सहायक महानिदेशक (फिलेटली), कक्ष संख्या 108 (बी), डाक भवन, पार्लियामेंट स्ट्रीट, नई दिल्ली-110001 पर भेज सकते हैं। स्पीड पोस्ट लिफाफे के ऊपर ’’डाक टिकट डिजायन प्रतियोगिता’’ अवश्य अंकित होना चाहिए।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हर किसी की चाहत होती है कि काश उसका बनाया चित्र डाक टिकट पर एक धरोहर के रूप में अंकित हो। ऐसे में यह एक सुनहरा मौका है, जहाँ डाक टिकट पर आप द्वारा बनाया मौलिक चित्र स्थान पा सकता है। ऐसे में बारिश में खेलते हुए बच्चे, सड़क पर खड़े होकर पानी में मस्ती करते हुए, नाव चलाते हुए सहित उनके द्वारा की जाने वाली विभिन्न अठखेलियों और बारिश से संबंधित अन्य तमाम विषयों पर बनाई गई प्रविष्टि को उन्हें भेजना होगा।




बाल दिवस पर डाक टिकट के लिए  ’बारिश में एक दिन’  थीम पर भेजें अपना बनाया चित्र 
डाक विभाग ने की डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता की घोषणा, 18 वर्ष तक के  लोग  लें सकेंगे भाग 

Wednesday, July 1, 2015

डाक विभाग को अगस्त में मिल सकता है भुगतान बैंक का लाइसेंस : रविशंकर प्रसाद

भारतीय डाक विभाग को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अगस्त तक भुगतान बैंक का लाइसेंस मिल सकता है। केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी  मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह उम्मीद जताई है।


प्रसाद के अनुसार, डाक विभाग ने भुगतान बैंक के लाइसेंस की खातिर आवेदन किया है। विभाग देशभर मैं फैले अपने नेटवर्क के जरिये भारतीय डाक बैंक के तौर पर काम करना चाहता है। पिछले एक साल के दौरान डाक विभाग ने कंप्यूटरीकरण के जरिये 27,215 डाकघरों को एक नेटवर्क में जोड दिया है।प्रसाद ने कहा कि यह लाइसेंस मिलने से देशभर में फैले 1,54,000 डाकघरों को जिनमें से 1,30,000 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, लोगों को बैंकिंग सेवाओं की पेशकश करने का अवसर मिल जायेगा.

रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के मुताबिक भुगतान यानी पेमेंट बैंक जनता को जमा और धन हस्तांतरण जैसे सीमित दायरे में सेवाएं देंगे।  डाक भुगतान बैंक अपने ग्राहकों को एटीएम अथवा डेबिट कार्ड तथा दूसरे भुगतान साधन दे सकेंगे। लेकिन इन्हें क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति नहीं होगी। शुरुआत में इनमें प्रति ग्राहक अधिकतम एक लाख रुपये तक खाते में रखे जा सकेंगे। डाक भुगतान बैंक द्वारा फिलहाल कोई कर्ज नहीं दी जा पायेगी। सूत्रों के मुताबिक प्रसाद ने अर्न्स्ट एंड यंग द्वारा सुझाए गए हाइब्रिड मॉडल को मंजूरी दे दी है। अर्न्स्ट एण्ड यंग ने ही भारतीय डाक बैंक के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की है !!