Saturday, February 21, 2009

डाक सेवाओं का बढ़ता सफर

भारतीय डाक एक विभाग के रूप में भले ही 1854 में स्थापित हुआ हो पर इसका सफर इससे भी पुराना है। भारत में व्यवस्थित डाक सेवा का प्रथम उद्धरण चन्द्रगुप्त मौर्य(321-297 ई0पूर्व) के काल का मिलता है। संदेशवाहक कबूतर भी मौर्य काल की ही देन है। डाक सेवाओं पर भारत में प्रथम लिखित विवरण जियाउद्दीन बरनी का मिलता है, जिसमें उल्लेख किया है कि 1226 ई0 में अलाउद्दीन खिलजी ने नियमित अश्व एवं धावकों को इस कार्य हेतु व्यवस्थित किया। इसी प्रकार मैसूर ने चिक्का देवराज वाड्यार के काल में 1672 ई0 में सबसे बढ़िया डाक व्यवस्था आरम्भ की, जिसे कि भारतीय डाक सेवा के इतिहास में प्रथम संस्थागत स्थापना माना जाता है। इस्ट इंडिया कम्पनी ने सर्व प्रथम 1688 में बम्बई और मद्रास के मध्य डाक लाइन स्थापित करने हेतु कदम उठाये। अंग्रेजों ने सर्वप्रथम 1727 में कलकत्ता के कोर्ट हाउस बिल्डिंग में डाकघर स्थापित किया। इसके ठीक 39 वर्ष बाद राबर्ट क्लाइव ने 24 मार्च 1766 को बंगाल में एक नियमित डाक व्यवस्था आरम्भ की और आदेश किया कि सभी पत्र सरकारी भवन से ही डिस्पैच होने चाहिए। इस हेतु एक पोस्टल राइटर (अब के पोस्टमास्टर) और एक सहायक की गवर्नमेन्ट हाउस में नियुक्ति की गई जो प्रत्येक रात को डाक प्राप्त करते, उनकी स्क्रूटनी करते और तत्पश्चात उसे डिस्पैच करते। 1774 में वारेन हेस्टिंग्स ने यह व्यवस्था की कि कम्पनी डाक के द्वारा लोगों के व्यक्तिगत पत्र भी फीस लेकर भेजे जा सकते हैं। इसके बाद डाक सेवाओं का विस्तार निरन्तर होता गया और 1854 में इसे एक विभाग रूप में स्थापित किया गया। 1947 में विभाजन के पश्चात भारत में 23344 डाकघर थे और कुल मेल ट्रैफिक 2204 मिलियन था। आजादी पश्चात डाक विभाग ने तमाम नये कदम उठाये। 21 नवम्बर 1947 को प्रथम डाक टिकट जारी किया और तत्पश्चात फिलैटली को एक शौक रूप में विकसित करने में अपना योगदान दिया। आवश्यकतानुसार डाक विभाग ने कई अन्य कार्य भी किये, जिसमें 1950 में टी0बी0 सील्स की डाकघरों द्वारा बिक्री शामिल थी। वर्ष 2004 में विभाग ने 150 वर्ष पूरे किये हैं और इसी वर्ष तमाम क्रान्तिकारी कदम उठाये। इनमें लाजिस्टिक पोस्ट, ई-पोस्ट, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम, म्युचुअल फण्डों की डाकघरों से बिक्री, ओरियन्टल इंश्योरेन्स कम्पनी के उत्पादों की बिक्री शामिल है। 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अगले वर्ष 26 जनवरी 2005 को प्रथम बार भारतीय डाक ने गणतंत्र दिवस परेड में अपनी झांकी प्रस्तुत की। इसी वर्ष राष्ट्रपति डाॅ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम ने देश भर से 150 डाकियों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया। वक्त के साथ डाक सेवाओं का काफिला बढ़ता गया और यह दस्तूर अभी भी जारी है।

3 comments:

Ram Shiv Murti Yadav said...

अहर्निश सेवा महे तो पहले से ही डाक विभाग का सूत्र वाक्य रहा है.

Akanksha Yadav said...

आज भी डाक विभाग का नेटवर्क इसकी सबसे बड़ी पूंजी है. इसे जनसेवा में तल्लीन करने की जरुरत है.

Unknown said...

Dak sewa par uplabdh jankari durlabh sreni ki hai.