Tuesday, January 27, 2009

प्रोजेक्ट एरो बदलेगा डाक घरों का चेहरा


भारतीय डाकघर अपनी साधारण छवि के साथ 150 वर्षों से अधिक समय से राष्ट्र को सेवाएं प्रदान कर रहा है। सामुदायिक जीवन में संचार के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में इस समय डाकघर को प्रौद्योगिकी के नवीनतम माध्यमों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है, जिन्होंने ‘कनेक्टिविटी‘ को पुनर्परिभाषित किया है। विश्व के सबसे बड़े नेटवर्क, 1।55 लाख डाकघरों के साथ तमाम कड़ी प्रतिस्पद्र्धा के बावजूद सामाजिक प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में डाक विभाग निरन्तर प्रयासरत हैं। सामान्यतया देखा गया है कि इतने बड़े नेटवर्क के बावजूद डाकघरों की कोई ब्राण्डिंग नहीं है एवं न ही एकरूपता है। हर डाकघर की अपनी अलग संरचना है। इसी के मद्देनजर युवा संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिन्धिया ने आई0टी0 के इस दौर में नई पहल करते हुए डाकघरों को ‘‘प्रोजेक्ट एरो‘‘ अवधारणा से एकरूप करने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत चयनित डाकघरों की कार्यप्रणाली को सभी क्षेत्रों में सुधार एवं उच्चीकृत करके पारदर्शी, सुस्पष्ट एवं उल्लेखनीय प्रदर्शन के आधार पर और आधुनिक बनाया जा रहा है। डाक वितरण, डाकघरों के बीच धन प्रेषण, बचत बैंक सेवाओं और ग्राहकों की सुविधा पर जोर के साथ नवीनतम टेक्नोलाजी, मानव संसाधन के समुचित उपयोग एवं आधारभूत अवस्थापना में उन्नयन द्वारा विभाग अपनी ब्राण्डिंग पर भी ध्यान केन्द्रित कर रहा है। भारतीय डाक विभाग प्रोजेक्ट एरो के तहत प्रथम चरण में पूरे देश में 50 एवं द्वितीय चरण में 450 डाकघरों को नवीनीकृत कर चुका है। तृतीय चरण में 4500 डाकघरों को चिन्हित किया गया है।


एरो के मूलतः दो भाग हैं- कार्यों का सम्यक रूप में सम्पादन एवं डाकघरों के लुक एवं फील को आधुनिक बनाना। प्रथम के अन्तर्गत डाक वितरण, पे्रषण, बचत बैंक एवं आफिस सर्विस में सुधार पर जोर है तो लुक एवं फील के अन्तर्गत डाकघरों की ब्राण्ंिडग, आई0टी0 पर जोर, मानव संसाधन का सम्यक विकास एवं आधारभूत संसाधनों में सुधार अपेक्षित है।


प्रोजेक्ट एरो के माध्यम से डाक विभाग पुनः अपनी मूल सेवा डाक वितरण पर विशेष रूप से जोर दे रहा है। डाक वितरण के तहत प्राप्ति के दिन ही सभी प्रकार की डाक चाहे वह साधारण, पंजीकृत, स्पीड पोस्ट या मनीआर्डर हो का उसी दिन शतप्रतिशत वितरण व डिस्पैच, लेटर बाक्सों की समुचित निकासी और डाक को उसी दिन की डाक में शामिल करना, डाक बीटों के पुनर्निर्धारण द्वारा वितरण को और प्रभावी बनाना एवं डाक वितरण की प्रतिदिन मानीटरिंग द्वारा इसे और भी प्रभावी बनाया जा रहा है। यही नहीं आवश्यकतानुसार वितरण का समय और भी पहले किया जा रहा है एवं टेªन व बसों पर डाक के पारागमन हेतु निर्भरता की बजाय मेल मोटर द्वारा इसे त्वरित बनाया जा रहा है।

बचत बैंक सेवाओ को पूर्णतया कम्प्यूटराइज्ड कर उनकी शतप्रतिशत डाटा फीडिंग और सिगनेचर स्कैनिंग भी कराई जा रही है, ताकि मैनुअली ढंग से कार्य संपादित करने पर होने वाली देरी से बचा जा सके। खातों के स्थानान्तरण में लगने वाले समय और ब्याज की त्वरित गणना पर भी जोर है। लोगों की सुविधा हेतु अब कम्प्यूटराइज्ड पास बुकंे जारी की जायेंगी। मृतक दावों का त्वरित निस्तारण भी प्रोजेक्ट एरो के तहत प्राथमिकता पर है। बचत बैंक संबंधी कार्यो हेतु लोगों को भटकना न पड़े, इसके लिए सिटीजन चार्टर का क्रियान्वयन, वेब आधारित ग्राहक शिकायत निस्तारण प्रणाली, सभी बचत बैंक फार्मों के भरे हुए प्रारूपों का पब्लिक हाल में डिस्प्ले किया गया है।

प्रोजेक्ट एरो द्वारा डाकघरों का कायाकल्प होने के साथ ही दूर-दराज ग्रामीण अंचलों में इसके लेखान्तर्गत स्थित डाकघरों की कार्यप्रणाली में भी काफी पारदर्शिता आयेगी। जनोपयोगी सूचना को पब्लिक हाल में उपलब्ध कराना, समुचित पेयजल, टायलेट व बैठने की व्यवस्था इत्यादि सहित तमाम महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर इस प्रोजेक्ट में क्रियान्वयन किया है। इसके अलावा कारपोरेट लुक के तहत काउण्टर स्टाफ हेतु यूनीफार्म का निर्धारण एवं काउण्टर्स की ब्रांडिंग भी की गयी है। डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं एवं उनकी दरों के लिए लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए पब्लिक हाल में टच-स्क्रीन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। टच स्क्रीन सुविधा द्वाराजहाॅ सभी डाक सेवाए एवं उनकी दरें निर्दिष्ट की गयी हैं, वहीं इसमें क्विज की रोचक सुविधा भी मुहैया करायी गयी है। इस टच स्क्रीन में नेट सर्फिंग का भी प्रावधान है।

Monday, January 26, 2009

डाक टिकटों के आईने में स्वतंत्रता संग्राम

*गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं सहित*
(वर्ष २००४ में भारतीय डाक के १५० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अगले वर्ष २६ जनवरी २००५ को प्रथम बार भारतीय डाक विभाग ने गणतंत्र दिवस परेड में अपनी झांकी प्रस्तुत की थी.यह एक स्मरणीय तथ्य है )

Wednesday, January 21, 2009

स्विस डाकघरों में लकड़ी के डाक टिकट

विभिन्न देश डाक टिकटों के प्रति लोगों को आकर्षित करने हेतु नित् नये प्रयोग करते रहते हैं। इसी क्रम में 5 अगस्त 2004 को स्विटजरलैण्ड ने चीड़ के पेड़ की लकड़ी का डाक टिकट जारी किया। चीड़ की लकड़ी से बना चैकोर आकार का यह डाक टिकट पांच स्विस फ्रेंक यानी चार अमेरिकी डालर की कीमत में जारी हुआ है। काष्ठ उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जारी किये गये इस डाक टिकट की मोटाई एक के्रडिट कार्ड की मोटाई के बराबर है। स्विटजरलैण्ड के लेखा चित्रकार थामस राथगेब ने इस डाक टिकट को डिजाइन किया है, जो 120 साल पुराने चीड़ के पेड़ की लकड़ी से बनाया गया। डाक टिकट के विविध चित्र उसी तरह से अनूठे हैं जिस तरह हर पेड़ अपने में निराला होता है। गौरतलब है कि स्विटजरलैण्ड इससे पहले फीते और चाकलेट की गंध वाले डाक टिकट जारी कर चुका है। 2001 में स्विस डाकघर ने एक चैकोर डाक टिकट जारी किया जिसमें चाकलेट की सुगंध समेटा एक छोटा सा कैप्सूल लगा था। एक साल पहले इसने स्विटजरलैण्ड के फीता बनाने वाले उद्योग को समर्पित एक और अनूठा डाक टिकट जारी किया था।

Monday, January 19, 2009

एक डाक टिकट 22 कैरेट सोने का

डाक टिकट जगत में नित नये अनूठे प्रयोग करने वाले देशों में भूटान का नाम सबसे ऊपर है। पिछले पचास वर्षों में इस छोटे से देश ने विदेशी मुद्रा कमाने के लिए अनूठे डाक टिकट निकाले हैं। उनमें त्रिआयामी, उभरे हुए रिलीफ टिकट, इस्पात की पतली पन्नियाँ, रेशम, प्लास्टिक और सोने की चमकदार पन्नियों वाले डाक टिकट शामिल हैं। साथ ही, सुगंधित और बोलने वाले (छोटे रिकार्ड के रूप में) डाक टिकट निकालकर भी भूटान ने सबको चौंकाया है।

भूटान ने वर्ष 1996 में 140 न्यू मूल्य वर्ग का ऐसा विशेष डाक टिकट जारी किया था जिसके मुद्रण में 22 कैरेट सोने के घोल का उपयोग किया गया था। विश्व के पहले डाक टिकट ‘पेनी ब्लैक‘ के सम्मान में जारी किये गये इस टिकट पर ‘22 कैरेट गोल्ड स्टेम्प 1996‘ लिखा है। इस टिकट की स्वर्णिम चमक को देखकर इसकी विश्वनीयता के बारे में कोई संदेह नहीं रह जाता। यह सूबसूरत डाक टिकट अब दुर्लभ डाक टिकटों की श्रेणी में माना जाता है क्योंकि अब यह आसानी से उपलब्ध नहीं है।

Sunday, January 18, 2009

महाराज प्रयाग नारायण मंदिर, शिवाला पर डाक विभाग द्वारा विशेष आवरण

भारतीय डाक विभाग ने कानपुर के प्रसिद्ध महाराज प्रयाग नारायण मंदिर, शिवाला पर दिनांक १७ जनवरी, २००९ को एक विशेष आवरण (लिफाफा) एवं इसका विशेष विरूपण जारी किया। कानपुर जी0पी0ओ0 द्वारा जारी किये गये इस विशेष आवरण का विमोचन श्री श्रीप्रकाश जायसवाल, गृहराज्य मंत्री, भारत सरकार द्वारा श्री रवीन्द्र पाटनी, मेयर कानपुर एवं भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारीगण श्री कृष्ण कुमार यादव व श्री उदय कृष्ण के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। मंदिर के 148 साल पूरे होने पर जारी (1861-2009) इस विशेष आवरण पर जहाँ मंदिर के गोपुरम का रेखाचित्र बना है, वहीं दुर्गा पूजा पर जारी डाक टिकट लगाकर इसका विरूपण किया गया है। विरूपण में भी मंदिर का चित्र बना हुआ है। गौरतलब है कि दक्षिण के त्रिचरापल्ली के श्री रंगम मंदिर के बाद तथा उत्तरी भारत में वृन्दावन के बाद महाराज प्रयाग नारायण मंदिर, दूसरा मंदिर है, जिसकी ख्याति देश के अलावा विदेशों तक में हैं। नागरी शैली में स्थापित इस मंदिर का ऊँचा गोपुरम व भव्य उज्जवल कलश दूर से ही अपनी अलग छटा बिखेरता है। बहुत कम लोगों को ज्ञात है कि मंदिरों की स्थापत्य के दृष्टिकोण से पॉँच भिन्न-भिन्न शैलियाँं हैं, जो दक्षिण के पॉँच प्रमुख राजवंशों की परिचायक हैं। ये पाँच मुख्य शैलियाँ कालक्रम में इस प्रकार हैं- पल्लव (600-1100 ई0 के लगभग), चोल (1100-1150 ई0 के लगभग), पांड्य (1100-1350 ई0 के लगभग), विजयनगर (1350-1565 ई0 के लगभग) एवं नायक (1600 ई0 के पश्चात)। इसमें प्रयाग नारायण शिवाला मंदिर विजयनगर शैली का है। इस शैली की मुख्य विशेषता है कि इसके प्रांगण में बाजार होता है, जो यहाँ पर भी है।अवसर पर विशेष आवरण का विमोचन करते हुए श्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर न सिर्फ कानपुर को विशिष्ट पहचान मिली है बल्कि कानपुर के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में महाराज प्रयाग नारायण मंदिर का नाम भी शुमार हो गया है। जिस कानपुर की पहचान या तो औद्योगिक नगर के रूप में रही है, या ब्रह्मावर्त के चलते, वहाँ उत्तर व दक्षिण का सेतुबन्ध कहे जाने वाले शिवाला के श्री रंगनाथ जी मंदिर पर विशेष आवरण जारी कर डाक विभाग ने कानपुर की सांस्कृतिक चेतना में प्राण फूँकने का कार्य किया है। महापौर श्री रवीन्द्र पाटनी ने इसे कानपुर के इतिहास में एक मील का पत्थर बताते हुए आशा की कि आने वाले दिनों में कानपुर के अन्य प्रसिद्ध स्थानों को भी यह गौरव प्राप्त होगा।
(गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और भारतीय डाक सेवा के अधिकारी के.के.यादव)
कार्यक्रम के आरम्भ में सभी का स्वागत करते हुए भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि कानपुर सदैव से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक धरोहरों एवं विभूतियों के मामले में अग्रणी रहा है। यही कारण है कि डाक विभाग ने अब तक कानपुर से जुड़े जहाँ 13 डाक टिकट जारी किये हैं, वहीं स्थानीय तौर पर अब तक 6 विशेष आवरण भी जारी किये गये हैं। श्री यादव ने बताया कि महाराज प्रयाग नारायण मंदिर, शिवाला अतीत के उस काल खण्ड का भी साक्षी है जब इसके प्रांगण में रहकर ही पं0 मोती लाल नेहरू ने कानपुर में अपनी वकालत शुरू की थी। इसी मंदिर के प्रांगण में झण्डा गीत के अमर रचयिता पद्मश्री श्याम लाल गुप्त ‘पार्षद‘ नित्य नंगे पैर रामायण का श्रवण करने आते थे। यहीं सन् 1884-85 में पं0 प्रताप नारायण मिश्र ने लावनी की अलख जगाई व नगर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों दंगल, शास्त्रार्थ आदि में अग्रणी रहे, जिसकी चर्चा पं0 मिश्र ने ‘ब्राह्मण‘ पत्रिका में भी की है। सन् 1965 से शिवाला प्रांगण में सन्त मनीषियों व विद्वानों के व्याख्यान का जो सूत्रपात हुआ था वह अनवरत् रूप से आज भी जारी है। पं0 राम किंकर उपाध्याय ने शिवाला में रामकथा रस की अविरल गंगा बहाई, जो आज भी जारी है। मंदिर के प्रांगण में प्रतिवर्ष सांस्कृतिक-साहित्यिक गतिविधियों के पर्याय ‘मानस संगम‘ संस्था का वार्षिकोत्सव लगता है, जिसमें देश-विदेश के विद्वानों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
(विशेष आवरण का विमोचन करते हुए श्री श्रीप्रकाश जायसवाल)
पोस्टमास्टर जनरल श्री उदय कृष्ण ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों को सवंर्धित करने का कार्य आरम्भ से ही डाक विभाग करता रहा है और इसी कड़ी में महाराज प्रयाग नारायण मंदिर पर जारी इस विशेष आवरण को भी देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन महाराज प्रयाग नारायण मंदिर के संरक्षक श्री बद्री नारायण तिवारी द्वारा एवं संचालन श्री प्रदीप दीक्षित द्वारा किया गया। मंचासीन अतिथियों को श्री मुकुल नारायण तिवारी एवं अभिनव नारायण तिवारी द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डाक विभाग के अधिकारियों के अलावा शहर के तमाम साहित्यकार, समाजसेवी, जन प्रतिनिधिगण एवं पत्रकार उपस्थित थे।
अभिनव नारायण तिवारी, प्रबन्धक- महाराजा प्रयाग नारायण मन्दिर, शिवाला, कानपुर-208001

Wednesday, January 14, 2009

डाक विभाग की मशहूर हस्तियाँ

दुनिया की तमाम नामी-गिरामी हस्तियों का किसी न किसी रूप में डाक विभाग से जुड़ाव रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति रहे अब्राहम लिंकन पोस्टमैन तो भारत में पदस्थ वायसराय लार्ड रीडिंग डाक वाहक रहे। विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक व नोबेल पुरस्कार विजेता सी0वी0 रमन भारतीय डाक विभाग में अधिकारी रहे वहीं प्रसिद्ध साहित्यकार व ‘नील दर्पण‘ पुस्तक के लेखक दीनबन्धु मित्र पोस्टमास्टर थे। 

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लोकप्रिय तमिल उपन्यासकार पी0वी0अखिलंदम, राजनगर उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अमियभूषण मजूमदार, फिल्म निर्माता व लेखक पद्मश्री राजेन्द्र सिंह बेदी, मशहूर फिल्म अभिनेता देवानन्द डाक कर्मचारी रहे हैं। उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द जी के पिता अजायबलाल डाक विभाग में ही क्लर्क रहे। 

ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी ने आरम्भ में डाक-तार विभाग में काम किया था तो प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा0 राष्ट्रबन्धु भी पोस्टमैन रहे। सुविख्यात उर्दू समीक्षक पद्मश्री शम्सुररहमान फारूकी, शायर कृष्ण बिहारी नूर, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध किसान नेता शरद जोशी सहित तमाम विभूतियाँ डाक विभाग से जुड़ी रहीं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती भी डाक-तार विभाग के कर्मचारी की ही पुत्री हैं।

 समकालीन साहित्य के तमाम नाम- कवि तेजराम शर्मा, साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव, कहानीकार दीपक कुमार बुदकी, कथाकार ए. एन. नन्द, शायर अब्दाली, गीतकार राम प्रकाश 'शतदल', गज़लकार केशव शरण, बाल साहित्यकार डा0 राष्ट्रबंधु, लघु कथाकार बलराम अग्रवाल, कालीचरण प्रेमी, अनुराग 'लाक्षाकर', मंचीय कवि जवाहर लाल 'जलज', शारदानंद दुबे इत्यादि भारतीय डाक विभाग की समृद्ध परंपरा के ही अंग हैं. स्पष्ट है कि डाक विभाग सदैव से एक समृद्ध विभाग रहा है और तमाम मशहूर शख्सियतें इस विशाल विभाग की गोद में अपनी काया का विस्तार पाने में सफल रहीं।

Saturday, January 3, 2009

टाइटेनिक यात्रियों के पत्र होंगे नीलाम

टाइटैनिक जहाज को डूबे एक लम्बा अरसा बीत गया, पर अभी भी उसकी यादें लोगों के जेहन में हैं। सबसे नई खबर यह है कि दुर्घटनाग्रस्त जहाज टाइटेनिक के यात्रियों के दो पत्रों को 16 जनवरी को न्यूयार्क में नीलाम किया जाएगा। इसमें एक पत्र उस काले दिन की घटना के अंतिम क्षणों का हृदय विदारक विवरण देता है, जब टाइटेनिक डूब रहा था। यह पत्र एडोल्फ साल्फेल्ड ने जल्दबाजी में अपनी पत्नी को लिखा था, जब 1912 में टाइटेनिक पहली समुद्री यात्रा के लिए साउथेंपटन से रवाना हुआ था और उत्तरी अटलांटिक में किसी हिमखंड से टकराकर डूब गया था जिसमें 1,500 यात्री मारे गए थे। नीलाम होने वाला दूसरा पत्र जाॅर्ज ग्राहम ने लिखा था, जो डिपार्टमेंट स्टोर का सेल्समैन था। स्पिंक स्मिथ नीलामघर के विशेषज्ञ राॅबर्ट लितजेनबर्गर ने अनुसार, इस पत्र में आर0एम0एस0 टाइटेनिक की मुहर लगी है और यह दुर्घटना से जुड़ी बहुमूल्य व दुर्लभ वस्तुओं में से एक है। इन पत्रों की नीलामी में प्रत्येक की बिक्री से 10 हजार से 20 हजार डाॅलर की आय होने की संभावना है। इन वस्तुओं को न्यूयार्क में और स्पिंक स्मिथ की वेबसाइट पर आॅनलाइन बिक्री के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। सो तैयार हो जाइये, आप भी इस नीलामी में भाग ले सकते हैं !!

Thursday, January 1, 2009