Tuesday, August 23, 2016

RS Sodhi appointed as Director on India Post Payments Bank board

Gujarat Co-operative Milk Marketing Federation (GCMMF) managing director RS Sodhi has been appointed as an independent director on the board of India Post Payments Bank, which will be the first public sector undertaking under the Department of Posts.

"Recently Sodhi was intimated about his appointment on the board of India Post Payments Bank," confirmed sources in GCMMF, which markets Amul brand of milk and milk products.

India Post Payments Bank received the certification of incorporation from the registrar of companies on August 17 . The payments bank is likely to commence its operations by March 2017.

India Posts Payments Bank is one of the 11 applicants to have received the Reserve Bank of India (RBI) approval for setting up the payments bank.

Payments bank licence allows companies to collect deposits, offer Internet banking, facilitate money transfers and sell insurance and mutual funds. India Post currently has the massive network of 1.55 lakh post offices across the country.

अमूल के एमडी आर.एस. सोढ़ी को इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है। वे पांच स्वतंत्र निदेशकों में से एक हैं। 

Saturday, August 20, 2016

मरुस्थल में भी मिलेगा गंगा का पवित्र जल, जैसलमेर प्रधान डाकघर से आरंभ हुई गंगा जल की बिक्री


 गंगा जल लाने के लिए अब गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार या इलाहाबाद और बनारस के गंगा तट जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी, बल्कि अब गंगा जल डाकघरों के माध्यम से आपके घर पर उपलब्ध होगा। अगर आपको गंगा जल की जरूरत है तो प्रधान डाकघर के काउंटर पर जाइए, निर्धारित कीमत अदा कीजिए और गंगाजल घर ले जाइए। डाक विभाग द्वारा आरम्भ की गई इस अभिनव योजना के तहत  20 अगस्त, 2016 को जैसलमेर प्रधान डाकघर में गंगाजल बिक्री का शुभारम्भ करते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इस योजना से डाक विभाग लोगों से  भावनात्मक स्तर पर भी जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि गंगाजल वितरण से लाभ कमाने का मकसद नहीं है, बल्कि डाक विभाग ने गंगाजल के प्रति लोगों की असीम आस्था एवं विश्वास की पवित्र भावना का सम्मान करते हुए गंगोत्री व ऋषिकेश से संग्रहित गंगाजल को उन तक पहुंचाने का प्रयास है, जिससे कि लोग लाभान्वित हो सकें। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि गंगा जल का विशेष महत्व है और परिवारों में पूजा-पाठ, अन्य धार्मिक अनुष्ठान, शादी-ब्याह  और यहाँ  तक कि श्राद्ध के वक्त गंगाजल की जरूरत होती है। ऐसे में प्रधान डाकघरों के माध्यम से  200 और 500 मिलीलीटर में ऋषिकेश से संग्रहित गंगाजल क्रमशः 15 और 22 रूपये में एवं 200 और 500 मिलीलीटर में ही गंगोत्री से संग्रहित गंगाजल क्रमशः 25 और 35 रूपये में उपलब्ध होगा। 

डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि चूँकि गंगा जल की बिक्री अभी प्रधान डाकघर के माध्यम से ही होगी, ऐसे में यदि कोई अपने द्वार पर ही गंगाजल मंगाना चाहता है तो वह  डाकघर में गंगाजल के मूल्य, पैकेजिंग चार्ज (200 मिलीलीटर की बोतल हेतु क्रमश: 13 रूपये एवं 500 मिलीलीटर हेतु 16 रूपये) और स्पीड पोस्ट दर का अग्रिम भुगतान कर मँगवा सकता है। ऐसे ग्राहकों को स्पीड पोस्ट से गंगाजल भेज दिया जायेगा।

इस अवसर पर डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने तमाम ग्राहकों को अपने हाथों से गंगाजल सौंपा। इस अवसर पर जोधपुर के सीनियर पोस्टमास्टर एल॰एस॰ पटेल, जैसलमेर प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर लालू राम भील, सहायक अधीक्षक पुखराज राठौड़, निरीक्षक डाकघर जैसलमेर सुमित सैनी, निरीक्षक डाकघरराजेंद्र सिंह भाटी,सहायक डाकपाल किशना राम गर्ग, सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।







Friday, August 19, 2016

India Post Payments Bank incorporated, to start in 2017

The Department of Posts’ plan to set up a payments bank has come one step closer to reality with The India Post Payments Bank Ltd (IPPB) receiving the certificate of incorporation from the Registrar of Companies on Wednesday, 17th August, 2016.

“With the incorporation, the Board of the India Post Payments Bank Limited is likely to be constituted soon. The incorporation of the IPPB Ltd is a significant step forward as this also paves the way for the bank to begin hiring of banking professionals to set up the bank and begin its operations in 2017,” an official statement said.

The Department of Posts is expected to complete the rollout of its branches all over the country by September 2017. In June,  Department of Posts had written to CMDs of several public sector banks to borrow officials from these lenders to fill the posts of chief executive officer and chief operating officer of the department’s upcoming payments bank.

The postal department’s secretary SK Sinha had said that it has written to CMDs of Punjab National Bank, Bank of Baroda, Bank of India, Canara Bank and Union Bank to ask if any of the board-level or executive director-level employees were willing to join the postal payments bank on a one-year deputation basis as CEO and COO.

To avoid conflict of interest, a similar letter was not sent to India’s largest lender State Bank of India because of its partnership with Reliance Industries Ltd, which has been granted a payments bank licence by the Reserve Bank of India.

The India Post Payments Bank will be managed professionally and most of its Grade A employees will be hired from market. The bank’s board will have representation from various other government departments, including the Department of Posts, Department of Expenditure, Department of Economic Services etc. According to a presentation made by Department of Posts to former Minister of Communications and Information Technology Ravi Shankar Prasad on June 2, the remuneration package for employees has been kept competitive to attract talent from public sector banks. Following withdrawal of three applicants that had been given in-principle licences for payments bank, Postal Secretary S.K. Sinha had allayed the fears of lack of a business model in the project, suggesting that the plan made sense for those entities, which have an outreach across the country.

“Coupled with the physical presence across 1.55 lakh post offices and the reach of “The Dakiya”, the India Post Payments Bank aims to become a powerful and effective vehicle of real financial inclusion in the country,” the statement issued Thursday said.

Courtesy : The Indian Express






Thursday, August 18, 2016

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक बना भारतीय डाक विभाग के अधीन संचालित प्रथम सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम


इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (India Post payment Bank, IPPB) को 17 अगस्त, 2016 को रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज, भारत द्वारा निगमन प्रमाणपत्र (Certificate of incorporation) प्रदान करने के बाद भारतीय डाक विभाग के अधीन संचालित यह प्रथम सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम : Public sector undertaking (PSU) बन गया है। डाक विभाग का यह बैंक मार्च 2017 से काम करना शुरू कर देगा। 

India Post Payments Bank Ltd Incorporated on 17th August, 2016. The first PSU under DoP is born.The Department of Posts’ plan to set up a payments bank has come one step closer to reality with The India Post Payments Bank Ltd (IPPB) receiving the certificate of incorporation from the Registrar of Companies on Wednesday, 17th August, 2016.

Wednesday, August 17, 2016

लोगों के सुख-दुःख में बराबर रूप से जुड़ा हुआ है डाक विभाग - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

डाक विभाग लोगों के सुख-दुःख में बराबर रूप से जुड़ा हुआ है। देश के हर दरवाजे पर अपनी पहुँच के साथ लोगों की विश्वसनीयता पर डाक विभाग सदैव खरा उतरा है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री जी ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में भी डाक विभाग का जिक्र करते हुए डाकियों की भूमिका की प्रशंसा की। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बाड़मेर मुख्यालय पर 17 अगस्त, 2016  को वृहद डाक मेले को संबोधित करते हुए कहा।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग सिर्फ चिट्ठी-पत्री और मनीऑर्डर ही नहीं बाँटता बल्कि बचत और बीमा सेवाओं से भी लम्बे समय से जुड़ा हुआ है। डाकघरों में हर वर्ग और उम्र के हर पड़ाव के लिए अलग-अलग बचत और बीमा योजनाएँ हैं। आई.टी. मॉडर्नाइजेशन के तहत राजस्थान के प्रायः सभी डाकघरों को कोर बैंकिंग (सीबीएस) से जोड दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग एवं एटीएम सुविधाओं का डाकघरों में भी लाभ उठा सकेंगे। डाक विभाग को पेमेंट बैंक का दर्जा मिलने के बाद इसकी सेवा और पहुँच में और भी इजाफा होगा। श्री यादव ने कहा कि डाकघरों को ऐसी जगह के रूप में विकसित किया जा रहा है,  जहाँ ग्राहकों को एक ही जगह पर जनोपयोगी सेवाएँ मिल सकें और आम आदमी को अपने दरवाजे पर ही आसानी से और सस्ती सेवाएँ प्रदान की जा सकें।


श्री यादव ने कहा कि डाक विभाग का उद्देश्य समावेशी विकास के तहत शहरों के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण अंचल स्थित लोगों को भी सभी योजनाओं के तहत लाना है। इसी क्रम में ग्रामीण शाखा डाकघरों को भी तकनीकी तौर पर दक्ष बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण आईसीटी के तहत  हाईटेक किया जायेगा और वहाँ पर नेटबुक व हैण्डहेल्ड डिवाइस भी दिया जायेगा। शाखा डाकघरों को सोलर चार्जिंग उपकरणों से जोडने के साथ-साथ मोबाइल थर्मल प्रिन्टर, स्मार्ट कार्ड रीडर, फिंगर प्रिन्ट स्कैनर, डिजिटल कैमरा एवं सिगनेचर व दस्तावेज स्कैनिंग के लिये यन्त्र भी मुहैया कराया जायेगा ताकि ग्रामीण लोगों को इन सुविधाओं के लिये शहरों की तरफ न उन्मुख होने पड़े ।

डाक विभाग की योजनाओं की चर्चा के क्रम में 10 साल तक की बालिकाओं के लिए आरम्भ सुकन्या समृद्धि योजना की चर्चा करते हुए निदेशक श्री यादव  कहा कि इससे बालिकाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा और उनकी उच्च शिक्षा और  विवाह में काफी सुविधा होगी। देश में मुख्यधारा से वंचित लोगों व उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आरम्भ अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन में भी डाकघरों द्वारा एक मुख्य व सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया जा रहा है।

बाड़मेर  मंडल के  डाक अधीक्षक श्री बी.आर. भिरानिया  ने कहा कि डाक विभाग अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए तत्पर है और इस दिशा में लोगों से समय-समय पर संवाद के साथ-साथ विभाग ने अपनी सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया है।


विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) श्री डूंगर दास खींची ने इस अवसर पर कहा कि डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से है और आज भी प्रायः यह हर किसी के जनजीवन से जुड़ा हुआ है। इस प्रकार के डाक मेले की सराहना करते हुये उन्होनें कहा कि ऐसे आयोजनों से जनता में जागरूकता बढ़ती है और लोग तमाम योजनाओं का फायदा उठा पाते हैं।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत अधीक्षक डाकघर बाड़मेर श्री बी.आर. भिरानिया , आभार ज्ञापन निरीक्षक डाक कृतिका पालीवाल और संचालन निरीक्षक डाक श्री खेमा राम ने किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय कार्यालय से डाक निरीक्षक श्री राजेन्द्र सिंह भाटी, निरीक्षक डाक चौहटन श्री राजीव कुमार,निरीक्षक डाक बालोतरा श्री देवा राम सुथार,डाकपाल बाड़मेर श्री महेश कुमार शर्मा सहित तमाम स्थानीय डाककर्मी, बचत अभिकर्तागण व नागरिकजन उपस्थित रहे।









Monday, August 15, 2016

डाक विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय, जोधपुर में धूमधाम से मनाया गया 70वां स्वतंत्रता दिवस

डाक विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय, जोधपुर में 15 अगस्त, 2016 को 70वां  स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।  इस अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का ध्वजारोहण राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा किया गया। राष्ट्रगान की धुनों के बीच जहाँ देश प्रेम संबंधी नारे लगाये गए, वहीं तमाम अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिवारीजन भी इस समारोह का हिस्सा बने।  

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने लोगों को संबोधित करते हुए 70 वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और अपने त्याग एवम बलिदान से देश को आजाद कराने वाले शहीदों, देशभक्त क्रांतिकारियों और महापुरुषों को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह आजादी हमें दीर्घकालीन संघर्ष और लाखों लोगों के बलिदान से मिली है, अत: हमें इस आजादी की कीमत को पहचानते हुए इसे अक्षुण्ण रखना होगा।

डाक निदेशक  कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर आजादी के सन्दर्भ में डाक विभाग की  ऐतिहासिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की गाथा सिर्फ अतीत भर नहीं है बल्कि आगामी पीढ़ियों हेतु यह कई सवाल भी छोड़ती है। भारतीयों के लिए यह दिन असाधारण है, जो हमें यह सोचने पर बाध्य करता है कि अपने भविष्य को बनाने के लिए हम अपनी पुरानी गलतियों को न दुहराएं और देश की एकता और अखण्डता की हर कीमत पर रक्षा करें । श्री यादव ने कहा कि  युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय स्वाधीनता आन्दोलन के इतिहास से रूबरू कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए और इतिहास को पाठ्यपुस्तकों से निकालकर लोकाचार से जोड़ना होगा।  भावी पीढ़ी में राष्ट्रीयता की भावना से ही राष्ट्र का विकास संभव होगा। आजादी का अर्थ सिर्फ राजनैतिक आजादी नहीं अपितु यह एक विस्तृत अवधारणा है, जिसमें व्यक्ति से लेकर राष्ट्र का हित व उसकी परम्परायें छुपी हुई हैं।

डाक निदेशक  कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि भारत सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाएँ डाक विभाग के माध्यम से संचालित हो रही हैं। इनमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत सुकन्या समृद्धि योजना, स्वच्छ भारत अभियान, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा  योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित तमाम  योजनाएं शामिल हैं।  इन्हें लोगों तक पहुँचाना हमारी प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए। तभी सही मायने में इस दिवस की सार्थकता होगी। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर समाज में बढ़ रही कुरीतियों की ओर ध्यान आकर्षित करके उनके निवारण में भागीदार बनने का भी आह्वान किया। उन्होंने  सभी अधिकारियों-कर्मचारियों से राष्ट्र की उन्नति हेतु अपने-अपने स्तर पर योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आजादी की शाश्वतता को बरकरार रखने के लिए  हम अपने स्तर पर छोटी-छोटी पहल करके समाज और राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने लोगों से वृक्षारोपण, लोगों को शिक्षित करने, पुस्तक-दान, अनाथों और वृद्धों की सहायता, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और स्वच्छ्ता अभियान जैसी तमाम पहल अपने स्तर पर शुरू कर देश की सुख-समृद्धि में भागीदार बनने की बात कही। इस अवसर पर डाक निदेशक श्री यादव और अन्य अधिकारियों ने  कैम्पस में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक भी किया। 

इस अवसर पर सहायक निदेशक कान सिंह राजपुरोहित, इशरा राम, रेलवे डाक अधीक्षक एल. आर. परिहार, लेखाधिकारी बी.पी. टाक, निरीक्षक राजेंद्र सिंह भाटी सहित तमाम विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र।
 क्षेत्रीय कार्यालय, जोधपुर-राजस्थान  में 70 वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ पर्व पर कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र द्वारा ध्वजारोहण। 


Flag hoisting was done by Krishna Kumar Yadav,  Director Postal Services, Rajasthan Western Region at Regional Office, Jodhpur on 70th Independence day. 




राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  कृष्ण कुमार यादव 70 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्टाफ को संबोधित करते हुए। 
70 वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ पर्व पर ध्वजारोहण पश्चात् क्षेत्रीय कार्यालय, जोधपुर के समक्ष कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र और अन्य अधिकारी-कर्मचारी गण। 






Sunday, August 14, 2016

आज भी डाकिया का इंतज़ार रहता है राखी पर

बिहार की राजधानी पटना. स्मार्ट सिटी की दौर में शामिल होने को बेताब. कॉलेज  कैंपस से लेकर रेलवे स्टेशन तक वाई-फाई कनेक्टिव. मैं कंकड़बाग स्थित अशोक नगर में शनिवार को अपने आवास पर फेसबुक व टविटर पर अंगुलियां चला रहा था. तभी अचानक कॉल बेल  की आवाज गूंजी. छोटे ठाकुर मतलब अपने बेटे आयुष को को कहा- देखो कौन है...? बाहर डाक बाबू खड़े थे. स्पीड पोस्ट से लेटर आया था. बड़ी दीदी ने राखी भेजी थी. साधारण लिफाफे  के अंदर अमूल्य प्रेम बंद था. कूरियर वालों पर दीदी को भरोसा नहीं था. उन्होंने फोन कर एड्रेस लिया और महज दो दिनों में राखी वाला लिफाफ मेरे हाथ में था. सच में आज भी डाक बाबू के भरोसे रहती हैं देश की करोड़ों बहनें और भाई घरों व कार्यालयों में डाक बाबू के आने के इंतजार में पलक पावड़े बिछाये रहते हैं. यूं कहें डाक विभाग भाई-बहन के प्यार को सदियों से संजो कर रखा है और आज भी वह अपनी जिम्मेवारी में रत्ती भर भी पीछे नहीं हटा है. बखूबी उसे निभा भी रहा है.    

खुशी से लेकर गम तक की जिम्मेवारी

डाकिया डाक लाया... डाक लाया... डाकिया डाक लाया... खुशी का पयाम कहीं, कहीं दर्दनाक लाया.. डाकिया डाक लाया... जी हां, भले ही पलकों की छांव में का यह गाना 70 के दशक का हो, लेकिन यह आज भी प्रासंगिक है. पाती में छिपे खुशी, गम, शहनाई की गूंज, गुजरने का दर्द से लेकर बंधु-बांधवों के कुशलक्षेम का सबों का इंतजार रहता है. इसी में भाई-बहन का प्यार व रेशम की डोर का बंधन भी छिपा है. जमाना इंटरनेट व वाइ-फाइ का हो गया है. ऑनलाइन शॉपिंग हो रही है. ब्रांडेड कंपनियां सामान की होम डिलिवरी करा रही हैं. बड़ी-बड़ी कूरियर कंपनियां दौड़ में शामिल हैं. लेकिन यह सब है मुट्ठी भर लोगों के लिए, वह भी बस शहरी क्षेत्र वालों के लिए. गांवों के करोड़ों-भाई बहनों के प्यार को संजोने वाला डाक विभाग ही है.  यही वजह है कि सावन के आते ही डाकघरों में रक्षाबंधन पर्व को लेकर राखी    भेजने वालों की भीड़ बढ़ जाती है. आज भी गांवों में डाक विभाग का जो क्रेज है, उसके सामने ऑनलाइन मार्केटिंग, होम डिलिवरी से लेकर कूरियर कंपनी तक फेल है. 

बहन की यही चाहत.. बस समय पर राखी पहुंचे

हमें याद है कि जब हम छोटे थे, तब मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर जैसे छोटे से कसबे में रहते थे. हालांकि वह धरती विश्वप्रसिद्ध चित्रकार आचार्य नंदलाल बसु और राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर के काव्य गुरु रामप्रसाद साधक जी की जन्मभूमि रही है. बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीबाबू की कर्मभूमि रही थी. सावन आते ही मां राखी भेजने की रट लगा देती थी. समय पर डाक घर जाकर राखी पोस्ट करने की हिदायत देती रहती थी. साथ ही यह कहना नहीं भूलती थी कि डाक बाबू  से यह भी पता लगा लेना कि हमारी भी राखी भी आयी है क्या? आज भी गांव से फोन आता है. मां कहती हैं, मामा को राखी जरूर पोस्ट करना देना. उन्हें बहुत अब भी नहीं पता है कि जमाना बदल गया है, उन्हें तो अभी भी वही डाकघर पर भरोसा है और जब से जाना है कि अब वहां से गंगाजल भी मिलने लगा है, तो खुशी से झूम ही उठी थीं. 

बुआ को फोन कर दो.. राखी आ गयी..

सच भी है कि समय के साथ पोस्टल डिपार्टमेंट ने भी समय के साथ खुद में काफी बदलाव किया है. बहनों को दिक्कत नहीं हो, राखी समय पर पहुंचे, इसके लिए डाक विभाग ने राखी स्पेशल लिफाफ भी उतारे हैं. लेकिन, आज भी जितनी राखियां साधारण लिफाफों में जाती हैं, शायद ही उतनी बिक्री स्पेशल लिफाफों की होती हो. बहनों को तो बस इससे ही मतलब रहता है कि राखी समय पर अपने भाई के पास पहुंच जाये और उनकी कलाइयों पर जगमगाये. अचानक मेरी तंद्रा टूटी, छोटे ठाकुर लिफाफे को फाड़ कर शोर मचा रहा था- बड़ी बुआ ने राखी भेजी है, वह घर के लोगों को घूम-घूम कर देखा रहा था. बीच-बीच चिल्ला भी रहा था कि राखी आ गयी.. राखी आ गयी.. बुआ को फोन कर दो पापा... राखी आ गयी...!!! 

- राजेश ठाकुर, प्रभात खबर, पटना   

Sunday, July 31, 2016

मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं- कृष्ण कुमार यादव




मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए हम सब बड़े हो गए। उनकी रचनाओं से बड़ी आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे इन रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था।  उक्त उद्गार 31 जुलाई को प्रेमचंद की जयंती पर राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं और हिंदी साहित्यकार साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। 

        निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य राजा-रानी के किस्सों, रहस्य-रोमांच में उलझा हुआ था। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा। प्रेमचन्द के साहित्यिकऔर सामाजिक विमर्श आज भूमंडलीकरण के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उनकी रचनाओं के पात्र आज भी समाज में कहीं न कहीं जिन्दा हैं। ‘गोदान’ ने प्रेमचन्द को हिन्दी साहित्य में वही स्थान दिया जो रूसी साहित्य में ‘मदर’ लिखकर मैक्सिम गोर्की को मिला। प्रेमचन्द जब अपनी रचनाओं में समाज के उपेक्षित व शोषित वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हैं तो निश्चिततः इस माध्यम से वे एक युद्ध लड़ते हैं और गहरी नींद सोये इस वर्ग को जगाने का उपक्रम करते हैं। उनका साहित्य शाश्वत है और यथार्थ के करीब रहकर वह समय से होड़ लेती नजर आती हैं। 

श्री यादव ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने को किसी वाद से जोड़ने की बजाय तत्कालीन समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से जोड़ा। राष्ट्र आज भी उन्हीं समस्याओं से जूझ रहा है जिन्हें प्रेमचन्द ने काफी पहले रेखांकित कर दिया था, चाहे वह जातिवाद या साम्प्रदायिकता का जहर हो, चाहे कर्ज की गिरफ्त में आकर आत्महत्या करता किसान हो, चाहे नारी की पीड़ा हो, चाहे शोषण और समाजिक भेद-भाव हो। कृष्ण कुमार यादव ने जोर देकर कहा कि आज प्रेमचन्द की प्रासंगिकता इसलिये और भी बढ़ जाती है कि आधुनिक साहित्य के स्थापित नारी-विमर्श एवं दलित-विमर्श जैसे तकिया-कलामों के बाद भी अन्ततः लोग इनके सूत्र किसी न किसी रूप में प्रेमचन्द की रचनाओं में ढूंढते नजर आते हैं। 

श्री कृष्ण कुमार यादव यादव ने कहा कि एक लेखक से परे भी उनकी चिन्तायें थीं और उनकी रचनाओं में इसकी मुखर अभिव्यक्ति हुई है। उनकी कहानियों और उपन्यासों के पात्र सामाजिक व्यवस्थाओं से जूझते हैं और अपनी नियति के साथ-साथ भविष्य की इबारत भी गढ़ते हैं। नियति में उन्हें यातना, दरिद्रता व नाउम्मीदी भले ही मिलती हो पर अंतत: वे हार नहीं मानते हैं और संघर्षों की जिजीविषा के बीच भविष्य की नींव रखते हैं।



श्री यादव ने बताया  कि उन्हें पिछले दिनों मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही जाने का सु-अवसर प्राप्त हुआ और वहाँ जाकर  मुंशी प्रेमचंद स्मारक लमही, वाराणसी के पुस्तकालय हेतु अपनी पुस्तक '16 आने 16 लोग' भी भेंट की, जिसमें एक लेख प्रेमचंद के कृतित्व पर भी शामिल है।




 (प्रेमचंद जयंती - क्या हुआ मुंशी प्रेमचंद के सपनों का -कृष्ण कुमार यादव)